भगत कबीर की रचनाओं की रूपकात्मक व्याख्याएँ और निर्धारित संगीत-शास्त्र में प्रस्तुतियाँ

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भगत कबीर सबद (१२१-१४०)

भगत कबीर – सबद १२१

बेद पुरान सभै मत सुनि कै करी करम की आसा ॥

रागु सोरठि, भगत कबीर, गुरु ग्रंथ साहिब, ६५४

भगत कबीर – सबद १२२

दुइ दुइ लोचन पेखा ॥

रागु सोरठि, भगत कबीर, गुरु ग्रंथ साहिब, ६५५

भगत कबीर – सबद १२३

जा के निगम दूध के ठाटा ॥

रागु सोरठि, भगत कबीर, गुरु ग्रंथ साहिब, ६५५

भगत कबीर – सबद १२४

जिह बाझु न जीआ जाई ॥

रागु सोरठि, भगत कबीर, गुरु ग्रंथ साहिब, ६५५

भगत कबीर – सबद १२५

किआ पड़ीऐ किआ गुनीऐ ॥

रागु सोरठि, भगत कबीर, गुरु ग्रंथ साहिब, ६५५

भगत कबीर – सबद १२६

हृदै कपटु मुख गिआनी ॥

रागु सोरठि, भगत कबीर, गुरु ग्रंथ साहिब, ६५६

भगत कबीर – सबद १२७

बहु परपंच करि पर धनु लिआवै ॥

रागु सोरठि, भगत कबीर, गुरु ग्रंथ साहिब, ६५६

भगत कबीर – सबद १२८

संतहु मन पवनै सुखु बनिआ ॥

रागु सोरठि, भगत कबीर, गुरु ग्रंथ साहिब, ६५६

भगत कबीर – सबद १२९

भूखे भगति न कीजै ॥

रागु सोरठि, भगत कबीर, गुरु ग्रंथ साहिब, ६५६

भगत कबीर – सबद १३०

सनक सनंद महेस समानाँ ॥

रागु धनासरी, भगत कबीर, गुरु ग्रंथ साहिब, ६९१

भगत कबीर – सबद १३१

दिन ते पहर पहर ते घरीआँ आव घटै तनु छीजै ॥

रागु धनासरी, भगत कबीर, गुरु ग्रंथ साहिब, ६९२

भगत कबीर – सबद १३२

जो जनु भाउ भगति कछु जानै ता कउ अचरजु काहो ॥

रागु धनासरी, भगत कबीर, गुरु ग्रंथ साहिब, ६९२

भगत कबीर – सबद १३३

इंद्र लोक सिव लोकहि जैबो ॥

रागु धनासरी, भगत कबीर, गुरु ग्रंथ साहिब, ६९२

भगत कबीर – सबद १३४

राम सिमरि राम सिमरि राम सिमरि भाई ॥

रागु धनासरी, भगत कबीर, गुरु ग्रंथ साहिब, ६९२

भगत कबीर – सबद १३५

बेद कतेब इफतरा भाई दिल का फिकरु न जाइ ॥

रागु तिलंग, भगत कबीर, गुरु ग्रंथ साहिब, ७२७

भगत कबीर – सबद १३६

अवतरि आइ कहा तुम कीना ॥

रागु सूही, भगत कबीर, गुरु ग्रंथ साहिब, ७९२

भगत कबीर – सबद १३७

थरहर कंपै बाला जीउ ॥

रागु सूही, भगत कबीर, गुरु ग्रंथ साहिब, ७९२

भगत कबीर – सबद १३८

अमलु सिरानो लेखा देना ॥

रागु सूही, भगत कबीर, गुरु ग्रंथ साहिब, ७९२

भगत कबीर – सबद १३९

थाके नैन स्रवन सुनि थाके थाकी सुँदरि काइआ ॥

रागु सूही ललित, भगत कबीर, गुरु ग्रंथ साहिब, ७९३

भगत कबीर – सबद १४०

एकु कोटु पंच सिकदारा पंचे मागहि हाला ॥

रागु सूही ललित, भगत कबीर, गुरु ग्रंथ साहिब, ७९३