भगत कबीर की रचनाओं की रूपकात्मक व्याख्याएँ और निर्धारित संगीत-शास्त्र में प्रस्तुतियाँ

सबदों की ऑडियो प्लेलिस्ट निर्धारित संगीत-शास्त्र में सुनें।

पृष्ठ २४

भगत कबीर सबद (४६१-४७२)

भगत कबीर – सबद ४६१

कबीर भाँग माछुली सुरा पानि जो जो प्रानी खाँहि ॥

सलोक, भगत कबीर, गुरु ग्रंथ साहिब, १३७७

भगत कबीर – सबद ४६२

नीचे लोइन करि रहउ ले साजन घट माहि ॥

सलोक, भगत कबीर, गुरु ग्रंथ साहिब, १३७७

भगत कबीर – सबद ४६३

आठ जाम चउसठि घरी तुअ निरखत रहै जीउ ॥

सलोक, भगत कबीर, गुरु ग्रंथ साहिब, १३७७

भगत कबीर – सबद ४६४

सुनु सखी पीअ महि जीउ बसै जीअ महि बसै कि पीउ ॥

सलोक, भगत कबीर, गुरु ग्रंथ साहिब, १३७७

भगत कबीर – सबद ४६५

कबीर बामनु गुरू है जगत का भगतन का गुरु नाहि ॥

सलोक, भगत कबीर, गुरु ग्रंथ साहिब, १३७७

भगत कबीर – सबद ४६६

हरि है खाँडु रेतु महि बिखरी हाथी चुनी न जाइ ॥

सलोक, भगत कबीर, गुरु ग्रंथ साहिब, १३७७

भगत कबीर – सबद ४६७

कबीर जउ तुहि साध पिरंम की सीसु काटि करि गोइ ॥

सलोक, भगत कबीर, गुरु ग्रंथ साहिब, १३७७

भगत कबीर – सबद ४६८

कबीर जउ तुहि साध पिरंम की पाके सेती खेलु ॥

सलोक, भगत कबीर, गुरु ग्रंथ साहिब, १३७७

भगत कबीर – सबद ४६९

ढूँढत डोलहि अंध गति अरु चीनत नाही संत ॥

सलोक, भगत कबीर, गुरु ग्रंथ साहिब, १३७७

भगत कबीर – सबद ४७०

हरि सो हीरा छाडि कै करहि आन की आस ॥

सलोक, भगत कबीर, गुरु ग्रंथ साहिब, १३७७

भगत कबीर – सबद ४७१

कबीर जउ गृहु करहि त धरमु करु नाही त करु बैरागु ॥

सलोक, भगत कबीर, गुरु ग्रंथ साहिब, १३७

भगत कबीर – सबद ४७२

चिंता भि आपि कराइसी अचिंतु भि आपे देइ ॥

सलोक, सेख फ़रीद, गुरु ग्रंथ साहिब, १३७६