भगत कबीर की रचनाओं की रूपकात्मक व्याख्याएँ और निर्धारित संगीत-शास्त्र में प्रस्तुतियाँ
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दार्शनिक गुरुओं के सबदों के रूपक संदेश
पृष्ठ १४
भगत कबीर सबद (२६१-२८०)
भगत कबीर – सबद २६१
कबीर झंखु न झंखीऐ तुमरो कहिओ न होइ ॥
सलोक, भगत कबीर, गुरु ग्रंथ साहिब, १३६६
भगत कबीर – सबद २६२
कबीर कसउटी राम की झूठा टिकै न कोइ ॥
भगत कबीर – सबद २६३
कबीर ऊजल पहिरहि कापरे पान सुपारी खाहि ॥
भगत कबीर – सबद २६४
कबीर बेड़ा जरजरा फूटे छेंक हजार ॥
भगत कबीर – सबद २६५
कबीर हाड जरे जिउ लाकरी केस जरे जिउ घासु ॥
भगत कबीर – सबद २६६
कबीर गरबु न कीजीऐ चाम लपेटे हाड ॥
भगत कबीर – सबद २६७
कबीर गरबु न कीजीऐ ऊचा देखि अवासु ॥
भगत कबीर – सबद २६८
कबीर गरबु न कीजीऐ रंकु न हसीऐ कोइ ॥
भगत कबीर – सबद २६९
कबीर गरबु न कीजीऐ देही देखि सुरंग ॥
भगत कबीर – सबद २७०
कबीर लूटना है त लूटि लै राम नाम है लूटि ॥
भगत कबीर – सबद २७१
कबीर ऐसा कोई न जनमिओ अपनै घरि लावै आगि ॥
भगत कबीर – सबद २७२
को है लरिका बेचई लरिकी बेचै कोइ ॥
भगत कबीर – सबद २७३
कबीर इह चेतावनी मत सहसा रहि जाइ ॥
भगत कबीर – सबद २७४
कबीर मै जानिओ पड़िबो भलो पड़िबे सिउ भल जोगु ॥
भगत कबीर – सबद २७५
कबीर लोगु कि निंदै बपुड़ा जिह मनि नाही गिआनु ॥
भगत कबीर – सबद २७६
कबीर परदेसी कै घाघरै चहु दिसि लागी आगि ॥
भगत कबीर – सबद २७७
कबीर खिंथा जलि कोइला भई खापरु फूट मफूट ॥
भगत कबीर – सबद २७८
कबीर थोरै जलि माछुली झीवरि मेलिओ जालु ॥
सलोक, भगत कबीर, गुरु ग्रंथ साहिब, १३६७
भगत कबीर – सबद २७९
कबीर समुँदु न छोडीऐ जउ अति खारो होइ ॥
भगत कबीर – सबद २८०
कबीर निगुसाँएं बहि गए थाँघी नाही कोइ ॥
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पृष्ठ २३: सबद (४४१-४६०)
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