भगत कबीर की रचनाओं की रूपकात्मक व्याख्याएँ और निर्धारित संगीत-शास्त्र में प्रस्तुतियाँ
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दार्शनिक गुरुओं के सबदों के रूपक संदेश
पृष्ठ १९
भगत कबीर सबद (३६१-३८०)
भगत कबीर – सबद ३६१
कबीरा रामु न चेतिओ जरा पहूँचिओ आइ ॥
सलोक, भगत कबीर, गुरु ग्रंथ साहिब, १३७१
भगत कबीर – सबद ३६२
कबीर कारनु सो भइओ जो कीनो करतारि ॥
भगत कबीर – सबद ३६३
कबीर फल लागे फलनि पाकनि लागे आँब ॥
भगत कबीर – सबद ३६४
कबीर ठाकुरु पूजहि मोलि ले मनहठि तीरथ जाहि ॥
भगत कबीर – सबद ३६५
कबीर पाहनु परमेसुरु कीआ पूजै सभु संसारु ॥
भगत कबीर – सबद ३६६
कबीर कागद की ओबरी मसु के करम कपाट ॥
भगत कबीर – सबद ३६७
कबीर कालि करंता अबहि करु अब करता सुइ ताल ॥
भगत कबीर – सबद ३६८
कबीर ऐसा जंतु इकु देखिआ जैसी धोई लाख ॥
भगत कबीर – सबद ३६९
कबीर मेरी बुधि कउ जमु न करै तिसकार ॥
भगत कबीर – सबद ३७०
कबीरु कसतूरी भइआ भवर भए सभ दास ॥
सलोक, भगत कबीर, गुरु ग्रंथ साहिब, १३७२
भगत कबीर – सबद ३७१
कबीर गहगचि परिओ कुटंब कै काँठै रहि गइओ रामु ॥
भगत कबीर – सबद ३७२
कबीर साकत ते सूकर भला राखै आछा गाउ ॥
भगत कबीर – सबद ३७३
कबीर कउडी कउडी जोरि कै जोरे लाख करोरि ॥
भगत कबीर – सबद ३७४
कबीर बैसनो हूआ त किआ भइआ माला मेलीं चारि ॥
भगत कबीर – सबद ३७५
कबीर रोड़ा होइ रहु बाट का तजि मन का अभिमानु ॥
भगत कबीर – सबद ३७६
कबीर रोड़ा हूआ त किआ भइआ पंथी कउ दुखु देइ ॥
भगत कबीर – सबद ३७७
कबीर खेह हूई तउ किआ भइआ जउ उडि लागै अंग ॥
भगत कबीर – सबद ३७८
कबीर पानी हूआ त किआ भइआ सीरा ताता होइ ॥
भगत कबीर – सबद ३७९
ऊच भवन कनकामनी सिखरि धजा फहराइ ॥
भगत कबीर – सबद ३८०
कबीर पाटन ते ऊजरु भला राम भगत जिह ठाइ ॥
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पृष्ठ १९: सबद (३६१-३८०)
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पृष्ठ २२: सबद (४२१-४४०)
पृष्ठ २३: सबद (४४१-४६०)
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